#Gazal by Abhishek Bharti ‘Chandan’

जाम आँखों से पिलाया भी नहीं,
वो न आयी औ बुलाया भी नहीं।

हो गयी बातें…..इशारों में मगर,
चाँद सा मुखड़ा दिखाया भी नहीं।

सामना जब भी हुआ तेरा मे’रा,
कुछ न बोली औ छुपाया भी नहीं।

रात भर यादें रुलाती ही रही,
और वो बोली सताया ही नहीं।

जानता हूँ मैं खफा क्यों है खुदा,
माथ सजदे में झुकाया ही नहीं।

ख्वाब में जा जा सितारों से मिले,
जेब में बाकी किराया भी नहीं।

अभिषेक भारती”चंदन”

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