#Gazal by Abid Mishbahi

दर्द में डूबी हुई इस रात का इजरा करो

कोई तो आकर मेरे हालात का इजरा करो

 

लुत्फ़ लेना बाद में बरसात का पहले ज़रा

मेरी आंखो से हुई बरसात का इजरा करो

 

दुश्मनों के घात मेरे दुश्मनों पर छोड़ दो

दोस्तों ने की है जो उस घात का इजरा करो

 

उसके हाथों की  हिना का ज़िक्र करना बाद में

पहले मेरे टूटते जज़्बात का इजरा करो

 

एक ही रस्ते से ढोली अर् जनाज़ा आ रहा

एक-दूजे की सजी बारात का इजरा करो

 

ख़ामियां मेरी गिना दो सामने मेरे अभी

पीठ पीछे क्यों कभी अग़लात का इजरा करो

 

इस भरी दुनिया में आबिद हर अमीरे शह्र से

हम फ़क़ीरों को मिली ख़ैरात का इजरा करो

 

आबिद मिस्बाही बरेली

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