#Gazal by Adil Sarfarosh ( Modh Adil Khan )

आदिल सरफरोश

 

मेरे जिस्म में  ज़रा सी जान रहने दो

अपने होठों पे एक मुस्कान रहने दो

 

तेरी  यादों  में मिलता है सुकून बेहद

अपनी यादों में मुझे परेशान रहने दो

 

इसमें  बसी  हैं  मेरे  बुज़ुर्गों की यादें

मुझे मार दो मेरा कब्रिस्तान रहने दो

 

सियासत  के  मुद्दे  हैं  और भी  बहुत

छोड़ो यार ये हिन्दू-मुसलमान रहने दो

 

मुझे डर है  निशाना  चूक न जाये

न चलाओ ये तीर-कमान रहने दो

 

इससे  पलता  है पेट मेरे बच्चों का

न तोड़ो ये चाय की दुकान रहने दो

 

न छाली, न कत्था, न सौंफ, न मिसरी

अमां  होगा  ये  बनारसी पान रहने दो

 

और कब तलक दुआएं दोगी मुझे

बस भी करो अम्मी-जान रहने दो

 

-आदिल सरफरोश

 

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