#Gazal by Adil Sarfarosh

रुख  हवा  का बदलने से क्या फायदा

गिर गए फिर संभलने से क्या फायदा

 

जिन  राहों  पर अपने बिछड़ते रहे हैं

उस मंजिल के मिलने से क्या फायदा

 

रात  भर  चाँद  करता  रहा है रोशनी

सुबह सूरज निकलने से क्या फायदा

 

हो  गए  हैं  वो  हमदम  किसी और के

उनकी चाहत में जलने से क्या फायदा

 

हुस्न वाले किसी के भी होते नहीं

साथ इनके चलने से क्या फायदा

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