#Gazal by Ajay Jain

खुद की छोड़ के चाहत

खुदा जीवन बनाने मे,

 

चंदन से सदा महके

विष उपसर्ग उपवन मे,

 

खुद ताप से तपते

हमे शीतल बनाने मे

 

संत खुद को जलाते हैं

जहाँ रोशन बनाने मे,,

अजय जैन अविराम

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