#Gazal by Ajay Jain

थके बीच मझधार

हाथ मलने वालों की

 

गिनती ना गुणगान

यहाँ गिरने वालों की

 

जलकर हुये हैं खाक

राख ढलने वालों की

 

हार जीत सम जान

धैर्य धरने वालों की

 

कोशिश कर्म प्रधान

सफलता बल वालों की

 

संघर्षों को जियो

शान चलने वालों की

अजय जैन अविराम.

One thought on “#Gazal by Ajay Jain

  • July 21, 2018 at 5:40 am
    Permalink

    Wah wah.kya bat he

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