#Gazal by Alok Shirivas

ग़ज़ल
***

नफरतों का बीज बोया किसने पता नहीं।
ये गलतियाँ थी मेरी कोई तेरी खता नहीं।।

आरजू जो पाने की हम तेरी किया करे।
तू नहीं मेरे नसीब में ये मुझको बता नहीं।।

मुक्कमल नहीं जिंदगी अब तो तेरे बगैर।
संग छोड़ के मेरा अब मुझको सता नहीं।।

एहसान है तेरा मुझ पे जो चाहा था कभी।
अब नही दिल में चाहत मुझको जता नहीं।।

आँखों से बरसा आँसू मन भीग सा गया।
न चढ़ी परवान फिर भी मन तो लता नहीं।।

रहगुज़र पे तेरी ‘आलोक’आँख है बिछाए।
है पता मुझे ये फिर भी तू बता धता नहीं।।

✍ ~ आलोक श्रीवास “आलोक”

48 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *