#Gazal by Amit Ahad

ग़ज़ल

जीवन का मक़सद देखेगी।

दुनिया   तेरा  क़द  देखेगी।।

 

खादी पहने  इन गुंडों को।

कब तक ये संसद देखेगी।।

 

फ़िरकापरस्ती बदनज़रों से।

मस्जिद का गुम्बद देखेगी।।

 

सूखी  धरती  उम्मीदों  से।

बारिश की आमद देखेगी।।

 

तू हो चाहे जितना अच्छा।

दुनिया तुझको बद देखेगी।।

 

दुनिया तेरी सब यादों को।

मुझसे बर आमद देखेगी।।

 

ख़ून जवानों  का यूँ बहते।

कब तक ये सरहद देखेगी।।

 

गाँव  गया  तो  ये  बीनाई।

फिर  सूखा बरगद देखेगी।।

 

करने को दीदार “अहद”का।

वो मुड़कर शायद देखेगी  –  अमित “अहद ”

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.