#Gazal by Amit Ahad

ग़ज़ल

कटा है जीवन उधेड़बुन में।

लगा रहा मन उधेड़बुन में।।

 

मज़ा न ले पाये बारिशों का।

कटा है सावन उधेड़बुन में।।

 

यकीं है कल वार वो करेगा।

अभी है दुश्मन उधेड़बुन में।।

 

ग़लत किया है जो तोड़ डाला।

हरेक   बन्धन  उधेड़बुन में।।

 

रिवाज फैला दहेज का क्यों ?।

हरेक  दुल्हन  उधेड़बुन में।।

 

मिज़ाज अपना फ़क़ीर जैसा।

लुटा दिया धन उधेड़बुन में।।

 

लगा रहा फ़िक्र में “अहद”मन।

किया है भोजन उधेड़बुन में।।

 

अमित “अहद ”

 

गाँव +पोस्ट -मुजफ्फराबाद  , जिला -सहारनपुर

 

फोन -09675150538

 

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