#Gazal by Amod Bindori

2122-2122-2122-212
आप को जाना ही है तो आज कल इतवार क्यों।
तोडना गर दिल ही है तो प्यार और मनुहार क्यों।।

आप की नजरें बयाँ क्यों कर बहाना है नया ।
आप की यह भीगती पलकों में ये उपहार क्यों।।

शौख था गर भूलना ही भूल जाते बे -शबब।
खुशबुएँ ज़ेहनी , अभी भी कर रहे गुलजार क्यों।।

रोक लो यह छटपटाती रूह का एहसास है ।
जल चुका है आशियाँ जो खोज इसमें प्यार क्यों।।

देखना गर चाहते हो मेरे चेहरे में ख़ुशी।
हाथ में लेकर खड़े हो आप ही औजार क्यों।।

मेरे अंदर ही कुचल देते मेरे अहसास को।
अधमरी इस पौध पर अब इश्क की बौछार क्यों।।

हूँ मैं जाहिल,नीच,घटिया,और दूषित खून है।
गालियों की उष्ण बारिश करते नहीं अब यार क्यों।।
/आमोद बिन्दौरी

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