# Gazal by Amod Bindouri

वो कहते हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला

बह्र-1222-1222-1222-1222

 

वो कहतें हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला।।

मैं कहता हूँ पुरानी थी नया रिश्ता बना डाला।।

 

न भूला कर की रिश्ते में मैं तेरा बाप हूँ बेटा।

कहाँ भूला जमी कुछ धूल उसको है हटा डाला।।

 

 

मैं कहता हूँ मेरी पहचान इक दिन आप की होगी।।

वो बोले तुझ से कितने  बीज बो कर के उगा डाला ।।

 

मुझे अब तक यकीं होता न उल्फत की मिसालों पर।

मुहब्बत नाम है किसका उसे किसका बना डाला।।

 

मेरे अहसास थे कागज के पन्नो में उन्हें लेकर।

के तुमने बेवफाई का अजब क़िस्सा बना डाला।।

आमोद बिंदौरी

 

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