#Gazal by Anand Pathak

टूट कर गिरता हुआ एक सितारा होता

दुआएं माँगने का कुछ तो सहारा होता।

 

तुम ही शामिल हो यहां बस्तियां जलाने में

काश के इनमे कोई घर भी तुम्हारा होता।

 

कम से कम थोड़ी वो मोहलत हमें भी दे देता

हम भी बच सकते थे गर उसका इशारा होता।

 

सुना है रास्ते उसने बताये बचने के

काश बचने का इरादा भी हमारा होता।

 

हम भले दूर थे पर लौट कर चले आते

देके आवाज कभी तुमने पुकारा होता।

 

 

आनंद पाठक—

बरेली (उत्तर प्रदेश)

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