#Gazal by Anand Pathak

अदाएं संभलती, नहीं हैं संभाले

खुदा उनकी नज़रों, से हमको बचा ले।

 

जाल इक छिपा है बातों में उसकी

जिसे चाहे इसमें, वो उसको फंसा ले।

 

हमे छोड़कर के, ना जाओ अकेला

तेरे बिना हम, नहीं जीने वाले।

 

शैतानियां खूब,करते थे हम भी

बचपन में घर से, गये हैं निकाले।

 

किसी से कोई मशवरा, अब ना कीजे

पड़े है अक्ल पे, यहाँ सब के ताले।

 

महंगी हुई हैं, यहाँ शादियां भी

तो क्यूँ ना पिता, अपनी पगड़ी उछाले।

 

लिये ज़िंदगी के, करना है कुछ तो

कहाँ मिल रहे हैं, मुफत के निवाले।

 

क्या मयकशी है, ये तुम हमसे पूछो

अभी तो बने हो, नए पीने वाले।

 

महफ़िल जमी है, न हमको उठाओ

पीने दो मुझको, ना गिनो मेरे प्याले।

 

 

 

—–आनंद पाठक—-

बरेली (उत्तर प्रदेश)

09557606700

07017654822

159 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.