#Gazal by Anand Pathak

हौंसलों में मेरी उड़ान अभी बाकी है

अभी टूटा नहीं हूँ, जान अभी बाकी है

 

रूठ कर क्यों गया आजा ये मेरा आखिर है

तुझे मनाने का अरमान अभी बाकी है

 

वहां तो बनने लगे शीशमहल अब सबके

गांव में अपना एक मकान अभी बाकी है

 

बेचने के लिए अब तो शहर में कुछ न बचा

तू न कर फिक्र ये नादान अभी बाकी है

 

दर्द अब ख़त्म हुआ चोट मेरी ठीक हुई

एक नए ज़ख़्म का अरमान अभी बाकी है

 

तबाह करने को जब जी मे हो चले आना

हुस्न का तेरे कदरदान अभी बाकी है

 

कितने आसानी से ये खत्म कहानी की है

मेरे दिल पे तेेेरा एहसान अभी बाकी है

 

जब कभी सोचेगा हमको तो तू भी रो देगा

हमारे चेहरे पे मुस्कान अभी बाकी है

 

चुप रहूं कुछ न कहूँ ये तो हो नहीं सकता

हमारे मुंह मे ये जुबान अभी बाकी है

 

ओढाई चादर एक गरीब को तो ऐसा लगा

मेरे अंदर भी इक इंसान अभी बाकी है|

—आनंद पाठक–

बरेली उत्तर प्रदेश

09557606700

07017654822

 

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