#Gazal by Anand Pathak

सपनें आंखों में ना सजाते, तो बतलाओ क्या करते

दर्द सभी से हम ना छुपाते, तो बतलाओ क्या करते।

 

रहती थी बातों में उसके, कोई प्यारी सी खुशबू

उसको साँसों में ना बसाते, तो बतलाओ क्या करते।

 

दिल में उसकी चाहत की भी, कोई ख्वाहिश जिंदा थी

उसको अपना हम ना बनाते, तो बतलाओ क्या करते।

 

एक नये गम ने फिर मुझसे, नाता अपना जोड़ लिया

उसको साथी हम ना बनाते, तो बतलाओ क्या करते।

 

समझ-समझ के समझ भी मेरी, छोड़ गई है साथ मेरा

अपने दिल को ना समझाते, तो बतलाओ की करते

 

आंखों में इक बसा समंदर, बेताब हुआ था निकलने को

आंख से आंसू हम ना बहाते, तो बतलाओ क्या करते।

 

ये तो हम हैं जो गम को सहकर, साथ निभाते रहते हैं

मुश्किल में हम काम ना आते, तो बतलाओ क्या करते।

 

—-आनंद पाठक—-

बरेली (उत्तर प्रदेश)

09557606700

 

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