#Gazal by Anand Pathak

मिलने जुलने के रहे अब यहां हालात नहीं

बात करनी है मगर होती, कोई बात नहीं।

 

हमारे दोस्तों को हमसे भी ये शिक़वा है

दिल तो मिलते हैं मगर होती मुलाकात नहीं।

 

हमारी छोड़ो समंदर के किनारे देखो

साथ रहते हैं मगर फिर भी हैं, वो साथ नहीं।

 

तमाम उम्र बदलने के बाद उसने कहा

के रही तुममे पहले जैसी, कोई बात नहीं।

 

ये जो दामन को तेरे बूंदों ने भिगोया है

ये तो आंसू हैं मेरे , मौसमी बरसात नहीं।

 

ऐसे नाकाम हुए इश्क़ की गलियारे में

हैं तो ज़िंदा मगर बाकी रहे ज़ज़्बात नहीं।

 

देख के आंख में इक रोज़ मौत से कह दो

डराए हमको तेरी इतनी तो औकात नहीं।

 

 

आनंद पाठक–

बरेली (उत्तर प्रदेश)

09557606700

07017654822

 

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