# Gazal by Anand Pathak

जिंदगी इस कदर, आजमाती रही।

देके गम हमको खुशियां, मनाती रही।

 

दीद उनका हुआ, इस कदर कुछ हमें

साँस आती रही सांस जाती रही।

 

जिस्म से तो अलग वो हुए हैं मेरे

रूह लेकिन उन्हें थी बुलाती रही।

 

आएंगे लौटकर मेरे हमदम अभी

गीत पनघट पे गोरी ये गाती रही।

 

इश्क़ का एक इज़हार बस न किया

वो हमें जाने क्या क्या सुनाती रही।

 

 

आनंद पाठक

बरेली (उत्तर प्रदेश)

09557606700

07017654822

 

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