#Gazal by Anand Pathak

कलियों के बीच में है, तू खिलता हुआ गुलाब।

लब तेरे मय के प्याले, हैं आंखें तेरी शराब।

 

मिसाल तेरे हुस्न की क्या देगा ये जहाँ

जो भी मिला है तुझसे, वो हुआ है लाजबाब।

 

कयूँ ओट में छुपाकर के रक्खा है चाँद यूँ

बेचैन मेरे दिल का है, कातिल तेरा हिजाब।

 

नींदों को छीन ले जो आराम तक न दे

जालिम तेरी जवानी, कयामत तेरा शबाब।

 

कयूँ चैन नहीं हमको, कुछ भी खबर नहीं

देखा है जबसे तुमको है, हालत जरा ख़राब।

 

 

–आनंद पाठक–

बरेली (उत्तर प्रदेश)  09557606700  –  07017654822

 

 

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