#Gazal by Anand Pathak

बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब
मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊलु फ़ाइलातु  मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
221 2121 1221 212

चुपचाप इस तरह से, यूँ जाया न कीजिए।
हम आपके हैं, आप पराया न कीजिए।

होती तड़प है दिल में, तुम्हें देखते हैं तो
गैरों के साथ दिल ये, लगाया न कीजिए।

रहना नहीं दिल में भला साथ में क्यूँ रहें
यूँ ख्वाब मेरे दिल को दिखाया न कीजिए।

अरमाँ हमारे दिल में, मचाते हैं हलचलें
ऐसे इशारे करके, बुलाया न कीजिए।

जब वास्ता नहीं है वफ़ा से तुम्हें कोई
अहदे-वफ़ा के राज़, सुनाया न कीजिए।

सबसे निभा रहे हो, यहां दोस्ती भी तुम
यूँ दुश्मनी हमीं से, निभाया न कीजिए।

रोते हुए लबों को हँसी दे सको तो दो
हँसते हुए किसी को, रुलाया न कीजिए।

लेनी अगर है जान तो पाठक की जान लो
है इल्तज़ा हमारी, सताया न कीजिए।
—आनंद पाठक—
बरेली (उत्तर प्रदेश)
-09557606700
-07017654822

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