#Gazal by Ankit Gujrati Raqeeb

गुलाब इतने महक रहे हैं।

 

बहुत से भवरे बहक रहे हैं।।

 

 

वो इतने अहले वफा थे तो फिर।

 

गली-गली क्यों भटक रहे है।।

 

 

बचा है क्या दशते शहर में अब।

 

जो इतना पंछी चहक रहे हैं।।

 

 

वो इतने नज़दीक आ गए है।

 

के दिल में शोले भड़क रहे है।।

रकीब

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.