#Gazal by Asha Shailli

सहर का ख्वाब टूटा देखने को
>> >> चले आए तमाशा देखने को
>> >>
>> >> उन्हेँ खुद पर गुरूरे जुस्तजू था
>> >> जमाना भी लगा था देखने को
>> >>
>> >> सितारे किसके टूटे आसमां से
>> >> शहर उमड़ा पड़ा था देखने को
>> >>
>> >> हमारे दर्द की हद है कहाँ तक
>> >> दरीचा खुल गया था देखने को
>> >>
>> >> अब आगे हो कोई आहो-फुगां क्यों
>> >> खड़ा सैय्याद चेहरा देखने को
>> >>
>> >> छुपी आँखों में कितनी तिश्नगी थी
>> >> न पैमाना कोई था देखने को
>> >>
>> >> कलम की नोक कैसे कुंद होती
>> >> हमारे पास दम था देखने को
>> >>
>> >> हसीनो की कबा की क्या कहें अब
>> >> बदन उघड़ा है सारा देखने को

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