#Gazal by Asha Shailly

बात दिल की जहाँ-जहाँ रखिए
एक परदा भी दरम्याँ रखिए

घोंसले जब बुने हैं काँटों से
क्यों बचाकर हथेलियाँ रखिए

हौसले अपने आज़माने को
हर कदम साथ आँधियाँ रखिए

मौसमों से नज़र मिलाने को
सर पे कोई न आसमाँ रखिए

हर जगह नाम उनका लिक्खा है
फिक्र है दासतां कहाँ रखिए

माया-ए-ग़म छुपाएँ किस-किस से
कीमती शै को अब कहाँ रखिए

बात दिल की किसी से तो कहिए
पास बेहतर है राज़दाँ रखिए

तब जनम लेगी नग़मगी शैली
दिल के जख्मों पे जब ज़ुबां रखिए

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