#Gazal By Aza Sawan Khan

ग़ज़ल

सिर्फ़ नेताओं की ही काली कमाई हो रही है
रोज़ मेरे मुल्क़ में अब तो लुटाई हो रही है

आज भी सोते हैं भूखे पेट कुछ मासूम बच्चे
सिर्फ़ कहने के लिये अब तो भलाई हो रही है

मंदिरों मस्जिद के झगड़े ख़त्म होते ही नहीं हैं
आज फिर उस केस की देखो सुनाई हो रही है

जिस्म तक महदूद होकर रह गया है प्यार अब तो
प्यार के ही नाम पर अब बेहयाई हो रही है

नाम जो बदनाम करते थे ख़ुदा का इस जहां में
कैद से मुश्किल बहुत उनकी रिहाई हो रही है

गिर गया था एक अंगारा अंगीठी से उछलकर
इसलिये जख्मी बहुत माँ की कलाई हो रही है

दे दिया मुझको ख़ुदा ने एक ऐसा इल्म ‘आज़म’
आज सबके दिल तलक मेरी रसाई हो रही है !

आज़म नैय्यर

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