#Gazal By Azaam Sawan Khan

ग़ज़ल

हर तरफ़ देखिये तो बहा ख़ून है
शहर की सड़कों पे ही जमा ख़ून है

दिल से मासूम था वो बहुत ही बशर
जिसका बेदर्दी से यूँ हुआ ख़ून है

मैं जिधर भी गया हूँ मेरे दोस्तों
मुझको हर राह पर ही मिला ख़ून है

देगा ज़ालिम को वो रब सज़ा एक दिन
जिसने मासूमों का यूँ किया ख़ून है

छोड़ दो आपसी ये लड़ाई सुनो
हर किसी का यहाँ एकसा ख़ून है

तीर से वार आज़म अदूँ ने किया
देखिये ज़िस्म से ही चला ख़ून है

आज़म सावन खान

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