#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

जो साथ साथ गुज़रा लम्हा नया नया है
ये प्यार का तुम्हारे रिश्ता नया नया है

कोई न साथ देगा तेरा यहाँ सफर में
चलना ज़रा संभलकर रस्ता नया नया है

देखा नहीं है उसके जैसा जहाँ में कोई
कल राह में मिला जो चेहरा नया नया है

खाने लगा है चक्कर अब तो दिमाग़ मेरा
खाया है इसने जो ये धाेखा नया नया है

होता है रश्क़ मुझको तक्दीर पर क्यों

उनकी किस्सत में रोज़ जिसकी दरिया नया नया है

देने लगी है दुनिया क्यों इश्क पर सजायें
शायद कुसूर मेरे दिल का नया नया है

आज़म को दे दुआयें ऐ माँ तू खूब सारी
सर पर जो घूमता है खतरा नया नया है

आज़म सावन खान
सहारनपुर

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