#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

यहाँ देखो खिले हैं गुल बहारें खूबसूरत हैं
भरी हैं खुशबूओ से यार राहें खूबसूरत हैं

मिले दीदार इनका रोज़ ही रब से दुआ ये है
तुम्हारी जो मेरे दिलबर ये आंखें खूबसूरत हैं

मुहब्बत की सुनूं हर रोज़ तुमसे मैं ज़ुबानी ये
बड़ी मीठी तुम्हारी यार बातें खूबसूरत हैं

तरसते हैं जिसे हर रोज़ मेरे कान सुननें को
मुहब्बत से भरी उनकी पुकारें खूबसूरत हैं

मेरे ख़्वाबों में लाती हैं तुम्हारा जो हसीं चहरा
बड़ी ही वो यहाँ तो यार रातें खूबसूरत हैं

खिले गुल की तरह मिलते यहाँ हर राह में चहरे
यहाँ तो हर तरफ़ देखो नज़ारे खूबसूरत हैं

चले आज़म उसी के साथ यूं ही उम्रभर अब तो
सहारा दें रही हैं जो वो बाहें खूबसूरत हैं

आज़म सावन खान

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