#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

यार चेहरा उदासी भरा देखकर
सोच में पड़ गया आइना देखकर

ख़त्म इन्सानियत अब दिलों से हुई
रो रहा दिल ये बिगड़ी दशा देखकर

दिल तड़प इस क़दर जो गया है मेरा
हर ख़ुशी का घटा दायरा देखकर

मैं गया मान जग में है जिन्दा वफ़ा
यार तुझमें सलामत वफ़ा देखकर

अज़नबी है वो मेरे लिये ही मगर
पर अपना सा मुझको वो लगा देखकर

हर तरफ़ ही मुसीबत भरी राह है
यार चलना यहाँ तू ज़रा देखकर

खाता आज़म वफ़ा की कसम था बहुत
फ़ेर उसने भी अब मुँह लिया देखकर

आज़म सावन खान

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