#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

 

ज़िंदगी में   ऐसा   लम्हा भी नहीं

अब कहीं पर चैन मिलता भी नहीं

 

बेबसी से  देखता  ही  रह गया

प्यार से वो आज बोला भी नहीं

 

छोड़कर जब से गया वो शहर को

दिल यहाँ अब  मेरा लगता भी नहीं

 

अजनबी है  हर इक चेहरा जो यहाँ

इस नगर में कोई  अपना भी नहीं

 

आज का दिन ढ़ल गया है ऐसे ही

आज वो जी भरके देखा भी नहीं

 

ग़म लगेगा दिल को ही मेरे बहुत

रुठना  देखो यूँ ही अच्छा भी  नहीं

 

प्यार की किससे मिलायें अब नज़र

पास में तो कोई  चेहरा  भी नहीं

 

देख लो आज़म मुहब्बत में मगर

अब वफा हर कोई करता भी नहीं

 

आज़म सावन खान

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