#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

ख़्वाब जिसका देखते है रात दिन
अब उन्हीं से फ़ासले है रात दिन

खो गये थे जो वफाओं के कभी
खोजते वो रास्ते है रात दिन

दोस्ती क्या वो निभायेंगे कभी
दिल बस वो खेलते हैं रात दिन

दूर हमसे आज भी रहता है वो
दिल से जिसको चाहते हैं रात दिन

किस तरह कह दें पराया आपको
आपके बस आपके हैं रात दिन

वो हमारी तोड़ सकता हद नहीं
दिल में अपने हौसले हैं रात दिन

होगा कब आज़म हमारा दिल से वो
जिसको यारो पूजते हैं रात दिन
आज़म नैय्यर

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