#Gazal By Azam Sawan Khan

[9:40 PM, 2/9/2019] Azam Sawan Khan: जो मेरे दिल के था हर पल क़रीब, ग़ायब है
बना हुआ था जो मेरा नसीब, ग़ायब है

नगर की राह पे अब चल तू बेधड़क हो के
की तेरी राह से अब हर रक़ीब ग़ायब है

करे जो टूटे हुए कल्ब का इलाज़ मेरे
नगर से आज कहीं वो तबीब ग़ायब है

दिखा दिया है उसे सच का आईना मैने
बता रहा था जो ख़ुद को हबीब, ग़ायब है

खिले हैं फूल बड़ी मुद्दतों के बाद यहाँ
यहाँ तो आज वो मौसम अज़ीब ग़ायब है

न लग रहा है यहाँ इसलिए ये दिल ‘आज़म’
वो मेरा मीत, वो मेरा हबीब ग़ायब है

आज़म सावन खान
[9:40 PM, 2/9/2019] Azam Sawan Khan:

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