#Gazal By Azam Sawan Khan

कसम से इन दिनों तन्हा बहुत हूँ
तुम्हारी याद में तड़पा बहुत हूँ

बुझेगी प्यास दिल की कब न जाने
किसी के प्यार का प्यासा बहुत हूँ

मुहब्बत में यकीं करके किसी पर
मैं हर पल टूटकर बिखरा बहुत हूँ

हकीक़त में नहीं वो साथ मेरे
मैं जिससे ख़्वाब में मिलता बहुत हूँ

खुशी तो देख पाया ही नहीं मैं
उदासी में मगर डूबा बहुत हूँ

बना कोई नहीं ‘आज़म’ सहारा
अकेला राह में भटका बहुत हूँ !
✍आज़म सावन खान✍

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