#Gazal By Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

हर तरफ़ हैं नफ़रतों की बारिशें
हैं कहाँ अब चाहतों की बारिशें

साँस कैसे ले सकेंगे दोस्तो
जब न होंगीं राहतों की बारिशें

ऐ ख़ुदा करदे करम हम पर ज़रा
दे दे हमको किस्मतों की बारिशें

बेवजह झूटी तसल्ली दे के वो
रोज़ करते हसरतों की बारिशें

शुक्र तेरा ऐ ख़ुदा करते हैं हम
तूने करदीं बरकतों की बारिशें

हर तरफ़ हैं लोग सहमे शह्र में
कब थमेंगीं आफ़तों की बारिशें

सोचता रहता है ‘आज़म’ रोज़ ये
आज होंगीं उल्फ़्तों की बारिशें
‘आज़म’ सावन ख़ान

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