#Gazal by Azam Sawan Khan

अश्कों में वो भीगता खामोश है

वक़्त उसको कर गया खामोश है

 

सच के रस्ते चलने वाले सोच ले

दूर तक ये रास्ता खामोश है

 

दर्द दिल का वो मेरा सुनता नहीं

जाने क्यों मेरा ख़ुदा खामोश है

 

लग गया है रोग उसको इश्क का

वो बड़ा मैंने सुना खामोश है

 

हाल दिल का कुछ बयाँ तो कर ज़रा

इस तरह से क्यों भला खामोश है

 

बात ऐसी बोल दी उसने मुझे

वो लबों को कर गया खामोश है

 

बोलता ‘आज़म’ नहीं वो कु़छ मुझे

रोज मुझको देखता खामोश है !

आज़म सावन खान

 

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One thought on “#Gazal by Azam Sawan Khan

  • January 9, 2018 at 2:23 pm
    Permalink

    Subhanllah.
    Bohat khoob

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