#Gazal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

 

 

जिस्म में डूबे लहू के फूल हैं

ये दिये मुझको अदू के फूल हैं

 

दे  रहा  है दर्द  कोई  दस्तकें

दिल में बिखरे आरजू के फूल हैं

 

बात करते थे नहीं हमसे मगर

चुन रहे अब गुफ़्तुगू के फूल हैं

 

दर्दों ग़म से जूझते इस शहर में

हर तरफ़ ही जुस्तजू के फूल हैं

 

कल ख़ुशी थी आज ग़म से ही भरे

मेरे दामन में रफू के फूल हैं

 

राह में हमने बिछायें हैं तेरी

पहली बारिश के शुरू के फूल है

 

दूर आज़म ग़म के साये हो गये

हर तरफ़ ही खुशगुलू के फूल हैं

 

 

आज़म सावन खान

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