#Gazal by Azam Sawan Khani

ग़ज़ल

मुझको हसीन यार की आँखें पसंद हैं
जो भी करे वो सारी ही बातें पसंद हैं

पहलू में मैं ही यार रहूँ उसके रातदिन
आती है ख़ुशबू जिससे वो सांसें पसंद हैं

महका रही हैं बाग जो अपने शबाब से
फूलों की खिलती सब वो कतारें पसंद हैं

देती है चैन प्यार कि ख़ुशबू से सांस को
खुशबू भरी वो मस्त फ़िज़ायें पसंद है

अपना बना लूँ मैं सदा के वास्ते उन्हें
दिल को बहुत वो काली सी आंखें पसंद हैं

करता है मुझसे जो वो मुहब्बत की रात दिन
महबूब की वो सारी ही बातें पसंद हैं

मदहोश दिल को जो करे अपने शबाब से
आज़म को उस हसीं के इशारे पसंद हैं

आज़म सावन खान

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