#Gazal by Azam Swan Khan

ग़ज़ल
न आँखों में मेरी नमी की तरह आ
लबों पे मेरे तू हँसी की तरह आ

लिखूँ में तुझे सोचकर रात दिन कुछ
मेरी ज़ीस्त में शाइरी की तरह आ

भुला दे सभी खार दिल से तू अपने
न तू ज़ीस्त में दुश्मनी की तरह आ

बदल जाये बन के वो मौसम न आना
सदा के लिये दोस्ती की तरह आ

नज़ाकत दिखाना मुझे छोड़ कर के
कभी ज़ीस्त में आशिकी की तरह आ

सभी दूर करने अंधेरे गमों के
मेरी राह में रोशनी की तरह आ

अगर प्यार है दिल में तेरे तो आना
न तू पास में बेरुखी की तरह आ

न आना कभी तू उदासी को लेकर
मेरी ज़िंदगी में ख़ुशी की तरह आ

न रह जाये प्यासा ये आज़म उमर भर
लबों पर मेरे शबनमी की तरह आ

✍आज़म सावन खान✍

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