#Gazal by Bal Krishna Lohar

ये ख्वाब, ये तमन्नाएँ यूँ ही न बह जाये
कुछ ऐसा कर जाये के याद रह जाये

खुद पे यक़ीन, ओर वक्त पर कदम उठें
कहि ये अरमानो के मकान यु ही न ढह जाये

कुछ मन्नत करें, कुछ इबादत हम
इंसानियत के नाते थोड़े ज़ख्म सह जाये

देख सुनहरी सुबह आ रही हे अपनी
कही हम सुबह से पहले ही न मर जाये

वो शख्श कब से अवाज़ दे रहा हमें
ज़रा कान लगायें, उसके दर जाये

आज कुछ ऐसा कह जाये, मेरे दोस्त
के लोगो के दिलो में घर कर जाये

खाली पड़ा है इंसानियत का मकां
मुहब्बत करें, ये मुहब्बतों से भर जायें।

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