#Gazal by aasee yusufpuri

वो कभी हमसे ख़फ़ा जब हो गए
“खूबसूरत सब नज़्ज़ारे खो गए”
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हो गए वो बज़्म में जब बे-नक़ाब
आइनों के दाग़ सारे धो गए
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है चलन कैसा ये तेरी बज़्म का
मेरे आते ही यहां से वो गए
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रात भर दहशत में थे अहले मकां
और जो फुटपाथ पर थे सो गए
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ख़ून आलूदा है गुल हर शाख़ पर
बीज नफ़रत का वो कैसा बो गए
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हज़रते “आसी” चलो रुस्वा सही
बज़्म से वो आपकी उठ तो गए
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सरफ़राज़ अहमद “आसी”
यूसुफ़पुर मुहम्मदाबाद
ज़िला ग़ाज़ीपुर
233227 उत्तर प्रदेश

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