#Gazal by aasee yusufpuri

दर्द सीने में कसक दिल में जगा देती है
जब भी आती है तेरी याद सज़ा देती है
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आग नफ़रत की हर एक सिम्त लगा देती है
ये सियासत है जो बस्ती को जला देती है
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जब भी आती है वह लहरा के घटाओं की तरह
प्यास कुछऔर मेरे दिल की बढ़ा देती है
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दोस्ती चाहे तो गुलज़ार बयाबाँ कर दे
दुश्मनी शहर को वीराना बना देती है
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प्यास कहती है समुन्दर की सिफ़त पैदा कर
भूक तहज़ीब के आदाब  भुला देती है
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माँ वो होती है जो गुस्से में भी अक्सर आसी
अपने बच्चों को सदा दिल से दुआ देती है
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सरफ़राज़ अहमद आसी

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