#Gazal by Aasiee Yusufpuri

जो  मुद्दतों   से  ख़फ़ा  रहा  है

क्यों  प्यार मुझसे  जता रहा है

हथेलियों पर वो नाम लिखकर

मेरा  मुझी  से    छुपा   रहा  है

फ़रेब  चेहरे  का था  मगर क्यों

निशाने  पर    आइना   रहा  है

लगा है उसको भी रोग दिल का

अकेले    में    मुस्कुरा   रहा  है

वो  बन्द  कमरे  में आज आसी

ग़ज़ल   मेरी   गुनगुना   रहा   है

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ग़ज़ल-सरफ़राज़ अहमद आसी

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