#Gazal by Aditya Mourya

जिसे मैने अपना खुदा माना था

आज वो ही मुझे भुला के बैठी है..।

ज़िंदा हूं आज भी उसकी हसीन यादों मे…

किसी और को वो अपना बना के बैठी है।

कर के मेरे इस  दिल के टुकड़े टुकड़े

वो अपना दिल किसी और से लगा बैठी है…।

कल तक जो चलती थी हाथों में हाथ लेकर

आज वो ही अपना हाथ किसी और को थमा बैठी है।

कवि आदित्य मौर्या

कंटालिया

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