#Gazal by Anil Shukla

तोड़ कर दिल मुस्कराकर चल दिए ।

मुझसे वो दामन छुड़ाकर चल दिए ।।

खुद से भी वो कर नहीं पाये वफा।

बेवफा मुझको बताकर चल दिए ।।

जो किया करते थे सजदा कल तलक।

वो मुझे ठोकर लगाकर चल दिए ।।

मेरी हिचकी पर जो घबरा जाते थे ।

आज वो मुझको रूलाकर चल दिए ।।

जिनको पलकों पर बिठा कर रक्खा था ।

इस तरह नजरें चुराकर चल दिए ।।

चन्द सिक्को के लिए यूं गिर गये ।

खाक मे मुझको मिलाकर चल दिए ।।

मेरे काबिल ही नही थे वो अनिल ।

शुक्र है जल्दी जताकर चल दिए ।।

-अनिल शुक्ल

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