#Gazal by Anil Shukla

जब-जब तुझे जहां मे कोई गम सतायेगा।

तब-तब तुझे ये दीवाना याद आयेगा ।।

जाना है तुझको जा मगर इक बार सोच ले।

क्या तू मेरी तरह कहीं दिलदार पायेगा ।।

बर्बाद हो गया मगर जफा नहीं किया ।

मेरी तरह से कौन वफा अब निभायेगा।।

तू प्यार से इस प्यार को समझ नहीं सका।

नफरत ही तुझे प्यार का मतलब बतायेगा।।

महफिल मे तू भले मुझे करता नहीं पसन्द ।

तन्हाई मे तू गीत मेरे गुनगुनायेगा ।।

ये इश्क है अजब है अजब इसकी रिवायत ।

पहले ये हंसायेगा और फिर रूलायेगा।।

नफरत हो जिसके दिल मे कैसे हंसे भला ।

जो मोहब्बत करेगा वो मुस्करायेगा।।

जो छोड़ गया था तुझे दिन के उजाले में।

जब होगी शाम खुद ही वो लौट आयेगा ।।

ले दे के किसी तरह पहुंच जाऊं घाट तक।

फिर हम भी बहती गंगा में डुबकी लगायेगा ।।

गर चमकना है फेंक दो कपड़े उतारकर।

हो पायेगा जो नंगा वही नहायेगा।।

मंजिल की चाह है गर कुछ कर्म कर अनिल ।

पछतायेगा अगर फक़त सपने सजायेगा।।

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