#Gazal by -Er Anand Sagar Pandey

*मैं तुमको भूल जाऊंगा*

मेरी आंखों को ढलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा,

मेरी सांसें निकलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

जमीं है एक मुद्दत से ज़ेहन में बर्फ यादों की,

ज़रा इसको पिघलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

अभी भी रौशनी आती है रह-रह कर मेरे घर से,

इसे पूरा तो जलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

बियाबां हो गया है दिल तुम्हारे छोड़ जाने से,

कोई ख्वाहिश तो पलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

लगी थी इक दफ़ा ठोकर मैं अब तक उठ ना पाया हूं,

ज़रा मुझको सम्भलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

बदलकर ही कभी खुद को मुझे तुमने भुलाया था,

ज़रा मुझको बदलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l

मैं “सागर” हूं मेरे अन्दर कई तूफ़ान उठते हैं,

मुझे यूं ही उबलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा ll

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-Er Anand Sagar Pandey

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