gazal by kavi anil uphar

तुमने नज़र भर एक बार देख लिया

शाम भी सुहानी रात मदहोश होगयी ।

 

तुमने छुआ तो अंग अंग महकाया सारा

होठ भी रसीले आँख झील जेसी होगयी

 

अंधेरों की चादर सिमटने लगी थी आज

रूप में नहाई रात चांदनी सी होगयी ।

 

मद भरे नयनों से तुमने पिलाये जाम

देख शबनम भी शराब जेसी होगयी ।

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