#Gazal by KISHOR CHHIPESHWAR “SAGAR”

“गम ए जुदाई में दर्द कितना सहना पड़ा

होंठ हंसते रहे लेकिन आँखों को

रोना पड़ा

ना आये वो दुबारा मेरी गलियों में

तनहा तनहा हमको

रहना पड़ा

जिसने भी पूछा हाल हमसे

खुश है हम हमको ये

कहना पड़ा

भूले नहीं एक पल भी तुम्हे

तुम्हे याद करके ही हमको

जीना पड़ा”

–किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(म.प्र.

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