Gazal by leena khatri

क्यूं

दरख्तों की शाखों पर
ये दरारें सी हैं क्यूं आई
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खामोश फिज़ा के शाने पर
ये तूफां सा उठा क्यूं है
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चट्टानों के सीने में
पिघलने लगे हैं शोले क्यूं
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दो दिलों के दरमियां
ये दूरियां है आखिर क्यूं
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जनम जनम का है रिश्ता फिर भी
टूट कर बिखरने लगा है क्यूं
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जब दिलों में दोनों के है शिद्दत की मोहब्बतें
फिर दिलों के दरमियां ये फासले हैं क्यूं
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प्रीत की गहरी यादों के साए
धुंधले से हो गए हैं क्यूं
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लीना खत्री

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