#Gazal by Rajinder Sharma Raina

बैठ तन्हा सोच लेना तू किधर जायेगा,
सच यही है ढेर मिट्टी का बिखर जायेगा।
लिख रहा कोई खता तेरी वफ़ा को देखता,
करम होंगे साथ तेरे तू जिधर जायेगा।
कर लिया खुद पे भरोसा गर तलब मन्जिल की,
फिर बुरा सा वक़्त भी हंस के गुजर जायेगा।
गर गुमां खुद पे किया तो चैन मिलना मुश्किल,
जो रहे उसकी रजा में फिर संवर जायेगा।
नाम का प्याला अगर जी भर के तू पी लेगा,
फिर कमी रहती न कोई तू निखर जायेगा।
सौ रहा नादान रैना”यूं खुली आंखे हैं,
फिर बता कैसे भला जीवन सुधर जायेगा। रैना”

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