#Gazal by ram krishan sharma ‘ bechain ‘

गजल,,,,

कभी तो मेरे बुलाने से आ

कभी  तो  मेरे , बुलाने  से  आ।

यूँ  ही नही ,किसी बहाने से आ ।

चढती  बेल , कोई  काट  ना दे

छुपते  छपाते , जमाने  से  आ।

सिलसिला  प्यार  का , बना  रहे

खुद अजमा कभी, मेरे अजमाने से आ।

रूठ जा ,ये हिस्सा है इश्क का

जिद कर फिर , मेरे मनाने से आ।

“बेचैन” को तड़पा दे ,मिलन के लिए

फिर  कभी  मेरे  ,तड़पाने  से आ।

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