#Gazal By Rifat Shaheen

आतिश ए इश्क़ जलाती है हमे

अपने दीदार की ठंडक दे दो

पास अ जाओ बे झिझक अ कर

दिल के दरवाज़े प दस्तक दे दो

हूँ तेरे दर प मैं साइल सा खड़ा

भीक में अपनी मुहब्बत दे दो

राह उलझी है ज़िंदगानी की

अब इसे जीने का मक़सद दे दो

One thought on “#Gazal By Rifat Shaheen

  • October 23, 2016 at 4:52 am
    Permalink

    वाह बहूत खूब ….

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